vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
»
श्लोक 207
श्लोक
2.10.207
প্রভু বলে,—“উঠ উঠ মুকুন্দ আমার
তিলার্ধেক অপরাধ নাহিক তোমার
प्रभु बले,—“उठ उठ मुकुन्द आमार
तिलार्धेक अपराध नाहिक तोमार
अनुवाद
प्रभु बोले, "उठो! उठो, मेरे प्यारे मुकुन्द! तुम्हारा लेशमात्र भी अपराध नहीं है।"
The Lord said, "Get up! Get up, my dear Mukunda! You have not committed the slightest crime."
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd