श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.10.207 
প্রভু বলে,—“উঠ উঠ মুকুন্দ আমার
তিলার্ধেক অপরাধ নাহিক তোমার
प्रभु बले,—“उठ उठ मुकुन्द आमार
तिलार्धेक अपराध नाहिक तोमार
 
 
अनुवाद
प्रभु बोले, "उठो! उठो, मेरे प्यारे मुकुन्द! तुम्हारा लेशमात्र भी अपराध नहीं है।"
 
The Lord said, "Get up! Get up, my dear Mukunda! You have not committed the slightest crime."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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