श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 195
 
 
श्लोक  2.10.195 
মনে চিন্তে মুকুন্দ পরম ভাগবত
“এ দেহ রাখিতে মোর না হয যুকত
मने चिन्ते मुकुन्द परम भागवत
“ए देह राखिते मोर ना हय युकत
 
 
अनुवाद
महाप्रतापी वैष्णव मुकुंद ने सोचा, "मुझे अपना जीवन जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।
 
The mighty Vaishnava Mukunda thought, “There is no need for me to continue my life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)