श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.10.19 
পুনর্ অপি মুরারিরে বলে বিশ্বম্ভর
“যে তোমার অভিমত, মাগি লহ বর”
पुनर् अपि मुरारिरे बले विश्वम्भर
“ये तोमार अभिमत, मागि लह वर”
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर ने फिर मुरारी से कहा, “जो भी वर चाहो मांग लो।”
 
Vishvambhar then said to Murari, “Ask for whatever boon you want.”
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