श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.10.16 
জানকীর চরণে করহ নমস্কার
যাঽর দুঃখ দেখিঽ, তুমি কান্দিলা অপার”
जानकीर चरणे करह नमस्कार
याऽर दुःख देखिऽ, तुमि कान्दिला अपार”
 
 
अनुवाद
“सीता के चरणों में प्रणाम करो, जिनके दुःख से तुम बहुत रुलाये।”
 
“Salute at the feet of Sita, whose sorrow made you cry a lot.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)