श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  2.10.152 
না বলে অদ্বৈত কিছু স্বভাব কারণে
না ধরে বৈষ্ণব-বাক্য, মরে ভাল মনে
ना बले अद्वैत किछु स्वभाव कारणे
ना धरे वैष्णव-वाक्य, मरे भाल मने
 
 
अनुवाद
अपने स्वभाव के कारण अद्वैत कुछ नहीं कहता, किन्तु जो वैष्णवों के कथन को स्वीकार नहीं करता, वह निश्चय ही पराजित हो जाता है।
 
Advaita, by its very nature, says nothing, but he who does not accept the words of the Vaishnavas is certainly defeated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)