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श्लोक 2.10.141  |
শরতের মেঘ যেন পরভাগ্যে বর্ষে
সর্বত্র না করে বৃষ্টি, কোথাহ বরিষে |
शरतेर मेघ येन परभाग्ये वर्षे
सर्वत्र ना करे वृष्टि, कोथाह वरिषे |
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| अनुवाद |
| शरद ऋतु के बादल हर जगह नहीं बरसते, बल्कि कुछ भाग्यशाली स्थानों पर ही बरसते हैं। |
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| Autumn clouds do not rain everywhere, but only in some lucky places. |
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