श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.10.14 
উঠ উঠ মুরারি, আমার তুমি প্রাণ
আমি—সেই রাঘবেন্দ্র, তুমি—হনুমান্
उठ उठ मुरारि, आमार तुमि प्राण
आमि—सेइ राघवेन्द्र, तुमि—हनुमान्
 
 
अनुवाद
"हे मुरारी, उठो, उठो। तुम मेरे प्राण हो। मैं रामचन्द्र हूँ और तुम हनुमान हो।"
 
"O Murari, get up, get up. You are my life. I am Ramchandra and you are Hanuman."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)