श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.10.129 
সম্প্রদায-অনুরোধে সবে মন্দ পডে
ঽসর্বতঃ পাণি-পাদṁ তত্ঽ—এই পাঠ নডে
सम्प्रदाय-अनुरोधे सबे मन्द पडे
ऽसर्वतः पाणि-पादꣳ तत्ऽ—एइ पाठ नडे
 
 
अनुवाद
"अपने-अपने संप्रदायों के अनुसार लोग गलत व्याख्याएँ करते हैं। श्लोक का वास्तविक पाठ 'सर्वतः पाणिपादं तत्' नहीं है।
 
"People make wrong interpretations according to their respective sects. The actual text of the verse is not 'Sarvatham Paanipadam Tat'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)