श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.10.112 
হরিদাস কান্দে, কান্দে মুরারি-শ্রীধর
হাসিযা তাম্বূল খায প্রভু বিশ্বম্ভর
हरिदास कान्दे, कान्दे मुरारि-श्रीधर
हासिया ताम्बूल खाय प्रभु विश्वम्भर
 
 
अनुवाद
जब हरिदास, मुरारी और श्रीधर रो रहे थे, भगवान विश्वम्भर मुस्कुराये और पान खा लिया।
 
While Haridas, Murari and Sridhar were crying, Lord Vishvambhara smiled and ate the betel leaf.
तात्पर्य
इन सब बातों को सुन कर हरिदास, मुरारी और श्रीधर प्रेम के आँसुओं बहाने लगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)