श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  2.10.105 
মহা-ভক্ত হরিদাস ঠাকুর জয জয
হরিদাস সঙরণে সর্ব-পাপ-ক্ষয
महा-भक्त हरिदास ठाकुर जय जय
हरिदास सङरणे सर्व-पाप-क्षय
 
 
अनुवाद
महान भक्त हरिदास ठाकुर की जय हो! हरिदास का स्मरण करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
 
All glory to Haridasa Thakura, the great devotee! Remembering Haridasa destroys all sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)