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श्लोक 2.10.104  |
এ বচন মোর নহে, সর্ব-শাস্ত্রে কয
ভক্তাখ্যান শুনিলে কৃষ্ণেতে ভক্তি হয |
ए वचन मोर नहे, सर्व-शास्त्रे कय
भक्ताख्यान शुनिले कृष्णेते भक्ति हय |
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| अनुवाद |
| यह मेरा कथन नहीं है, यह सभी शास्त्रों का निर्णय है। भक्तों के विषय में सुनने मात्र से ही कृष्ण के प्रति भक्ति उत्पन्न हो जाती है। |
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| This is not my statement, it is the verdict of all the scriptures. Just hearing about devotees generates devotion to Krishna. |
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