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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 103
श्लोक
2.10.103
হরিদাস-স্তুতি-বর শুনে যেই জন
অবশ্য মিলিবে তারে কৃষ্ণ-প্রেম-ধন
हरिदास-स्तुति-वर शुने येइ जन
अवश्य मिलिबे तारे कृष्ण-प्रेम-धन
अनुवाद
जो कोई भी हरिदास की प्रार्थना और उनसे प्राप्त आशीर्वाद को सुनता है, उसे निश्चित रूप से कृष्ण-प्रेम का खजाना प्राप्त होगा।
Whoever listens to the prayers of Haridasa and receives blessings from him will certainly attain the treasure of Krishna-love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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