शूद्रम् वा भगवद्भक्तम् निषाड़ंश्वपचं तथा
वीक्षते जातिसामान्यात् स याति नरकम् ध्रुवम्
"जो भगवान् के भक्त को जो शूद्र, निषाद या चंडाल परिवार में जन्मे है को व्यक्ति को उस जाति का समझता है निसंदेह वह नरक जाएगा |
श्वपाकम् इव नेक्षते लोक विप्रम् अवैष्णवम्
वैष्णवो वर्णोबाह्य पिय पुनति भुवनत्रयम्
"यदि ब्राह्मण परिवार में जन्मा एक वैष्णव नहीं है, तो व्यक्ति को उसका चेहरा नहीं देखना चाहिए। जैसे व्यक्ति को चंडाल या डॉग ईटर के चेहरे पर नहीं देखना चाहिए। हालाँकि वर्णो के अलावा ब्राह्मण में पाया जाने वाला वैष्णव तीनों लोकों को पवित्र कर सकता है।
अर्चे विष्णौ शिला-धीर गुरुषु नर-मतीर वैष्णवे जाति-बुद्धिर
विष्णोर वा वैष्णवानम् कलि-मल-मथने पाद-तीर्थे अम्बु-बुद्धि
श्री विष्णोर नामनि मन्त्रे सकल-कलुष-हे शब्द-सामान्य-बुद्धिर
विष्णु सर्वेश्वरेषे तदितर-सम-धीर यस्य वा नारकी सः।
"मंदिर में देवता को लकड़ी या पत्थर से बना हुआ मानने वाला व्यक्ति, शिष्य परंपरा में गुरु को एक साधारण मनुष्य के रूप में मानता है, जो वैष्णव को अच्युत-गोत्र में एक निश्चित जाति या पंथ से संबंधित मानता है या चरणामृत या गंगा जल को साधारण पानी समझता है। नरक का निवासी माना जाता है। "
