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श्लोक 2.1.95  |
স্থির হৈ, ক্ষণেকে বসিলা বিশ্বম্ভর
তথাপি আনন্দ-ধারা বহে নিরন্তর |
स्थिर है, क्षणेके वसिला विश्वम्भर
तथापि आनन्द-धारा वहे निरन्तर |
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| अनुवाद |
| कुछ समय बाद विश्वम्भर शांत होकर बैठ गये, फिर भी उनके हृदय में प्रेम की धारा प्रवाहित होती रही। |
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| After some time, Vishvambhar sat down quietly, yet the stream of love continued to flow in his heart. |
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