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श्लोक 2.1.88  |
গৃহের ভিতরে মূর্ছা গেলা গদাধর
কেবা কোন্ দিকে পডে, নাহি পরাপর |
गृहेर भितरे मूर्छा गेला गदाधर
केबा कोन् दिके पडे, नाहि परापर |
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| अनुवाद |
| गदाधर पंडित कमरे में ही बेहोश होकर गिर पड़े। कोई नहीं जानता था कि कौन किस पर गिरा। |
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| Gadadhara Pandita fell unconscious in the room. No one knew who fell on whom. |
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