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श्लोक 2.1.83  |
পরম-আনন্দে সবে করেন সম্ভাষ
প্রভুর নাহিক বাহ্য-দৃষ্টি-পরকাশ |
परम-आनन्दे सबे करेन सम्भाष
प्रभुर नाहिक बाह्य-दृष्टि-परकाश |
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| अनुवाद |
| सबने बड़ी प्रसन्नता से उनका अभिवादन किया, परन्तु भगवान ने कोई बाह्य दर्शन नहीं दिया। |
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| Everyone greeted him with great joy, but the Lord did not give any external darshan. |
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