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श्लोक 2.1.7  |
জয জয শ্রীবাসাদি প্রিয-বর্গ-নাথ
জীব-প্রতি কর’ প্রভু! শুভ-দৃষ্টি-পাত |
जय जय श्रीवासादि प्रिय-वर्ग-नाथ
जीव-प्रति कर’ प्रभु! शुभ-दृष्टि-पात |
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| अनुवाद |
| श्रीवास आदि भक्तों के स्वामी की जय हो! हे प्रभु, जीवों पर अपनी कृपादृष्टि बनाइए! |
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| O Lord, bestow Your mercy upon all living beings! |
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