|
| |
| |
श्लोक 2.1.45  |
“কোথা কৃষ্ণ! কোথা কৃষ্ণ!”বলযে ঠাকুর
বলিতে বলিতে প্রেম বাডযে প্রচুর |
“कोथा कृष्ण! कोथा कृष्ण!”बलये ठाकुर
बलिते बलिते प्रेम बाडये प्रचुर |
| |
| |
| अनुवाद |
| भगवान चिल्लाये, "कृष्ण कहाँ हैं? कृष्ण कहाँ हैं?" इस प्रकार पुकारते हुए उनका प्रेम निरंतर बढ़ता गया। |
| |
| The Lord cried out, "Where is Krishna? Where is Krishna?" Calling out in this way, His love continued to grow. |
| ✨ ai-generated |
| |
|