श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.1.43 
বুঝিতে না পারে আই পুত্রের চরিত
তথাপিহ পুত্র দেখি’ মহা-আনন্দিত
बुझिते ना पारे आइ पुत्रेर चरित
तथापिह पुत्र देखि’ महा-आनन्दित
 
 
अनुवाद
माता शची अपने पुत्र के आचरण को समझ नहीं सकीं, फिर भी उसे देखकर वे अत्यन्त प्रसन्न हुईं।
 
Mother Shachi could not understand her son's behavior, yet she was very happy to see him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)