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श्लोक 2.1.42  |
নিরবধি কৃষ্ণাবেশ প্রভুর শরীরে
মহা-বিরক্তের প্রায ব্যবহার করে |
निरवधि कृष्णावेश प्रभुर शरीरे
महा-विरक्तेर प्राय व्यवहार करे |
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| अनुवाद |
| भगवान के शरीर में कृष्ण का परमानंद प्रेम निरन्तर दृष्टिगोचर होता था और वे अपने व्यवहार में अत्यन्त त्यागी हो जाते थे। |
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| The ecstatic love of Krishna was constantly visible in the body of the Lord and he became extremely renunciant in his behavior. |
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