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श्लोक 2.1.406  |
শিষ্য-গণ বলেন,—“কেমন সঙ্কীর্তন?”
আপনে শিখাযেন প্রভু শ্রী-শচীনন্দন |
शिष्य-गण बलेन,—“केमन सङ्कीर्तन?”
आपने शिखायेन प्रभु श्री-शचीनन्दन |
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| अनुवाद |
| विद्यार्थियों ने पूछा, “हम संकीर्तन कैसे करें?” तब शचीपुत्र ने स्वयं उन्हें इस प्रकार कीर्तन करना सिखाया। |
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| The students asked, “How should we chant?” Then Sachiputra himself taught them how to chant. |
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