श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 406
 
 
श्लोक  2.1.406 
শিষ্য-গণ বলেন,—“কেমন সঙ্কীর্তন?”
আপনে শিখাযেন প্রভু শ্রী-শচীনন্দন
शिष्य-गण बलेन,—“केमन सङ्कीर्तन?”
आपने शिखायेन प्रभु श्री-शचीनन्दन
 
 
अनुवाद
विद्यार्थियों ने पूछा, “हम संकीर्तन कैसे करें?” तब शचीपुत्र ने स्वयं उन्हें इस प्रकार कीर्तन करना सिखाया।
 
The students asked, “How should we chant?” Then Sachiputra himself taught them how to chant.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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