श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 385
 
 
श्लोक  2.1.385 
কার্ স্থানে গিযা আর কিবা পডিবাঙ?
সেই ভাল,—তোমা হৈতে যত জানিলাঙ”
कार् स्थाने गिया आर किबा पडिबाङ?
सेइ भाल,—तोमा हैते यत जानिलाङ”
 
 
अनुवाद
"हम किसके पास जाएँ, और क्या अध्ययन करें? हमने आपसे जो कुछ भी सीखा है, उससे हम पूरी तरह संतुष्ट हैं।"
 
"Whom should we go to, and what should we study? We are perfectly satisfied with what we have learned from you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)