श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.1.38 
প্রভু কহে,—“বন্ধু সব! আজি ঘরে যাহ
কালি যথা বলি’ তথা আসিবারে চাহ
प्रभु कहे,—“बन्धु सब! आजि घरे याह
कालि यथा बलि’ तथा आसिबारे चाह
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "हे मित्रों, आज घर लौट जाओ। मैं तुम्हें बता दूँगा कि कहाँ आना है ताकि हम कल मिल सकें।"
 
The Lord said, "Friends, go back home today. I will tell you where to come so we can meet tomorrow."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)