यत् पाँदोधक आधाय शिव शिरसि नृत्यति |
यन नाली नालिनद असिद ब्रह्मा लोका पितामहः
यद्इच्छा शक्ति विक्षोभाद ब्रम्हाण्डोद्भव सन्क्षयौ |
तम आर्द्धअया गोविन्दं स्थान अग्रयं यद् इच्छति |
"यदि कोई सबसे श्रेष्ट निवास चाहता है, तो उसे श्री गोविंद के चरणों की पूजा करनी चाहिए। शिव उनके चरणों को धोने वाले पानी को अपने सिर पर रखकर परमानंद में नृत्य करते हैं, मनुष्य जाति के जनक ब्रह्मा उनके नाभिकमल से पैदा हुए हैं, और ब्रह्माण्ड का निर्माण और विनाश बस उनकी इच्छा शक्ति के उद्घाटन के परिणामस्वरूप होता है।"
