श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 308
 
 
श्लोक  2.1.308 
পাইযা বৈকুণ্ঠ-নাযকের আলিঙ্গন
প্রেমে পূর্ণ রত্নগর্ভ হৈলা তখন
पाइया वैकुण्ठ-नायकेर आलिङ्गन
प्रेमे पूर्ण रत्नगर्भ हैला तखन
 
 
अनुवाद
वैकुण्ठ के भगवान द्वारा गले लगाए जाने पर, रत्नगर्भ भगवान के प्रेम से भर गया।
 
On being embraced by the Lord of Vaikuntha, Ratnagarbha was filled with the love of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)