श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 306
 
 
श्लोक  2.1.306 
দেখে বিপ্র-বর, তাঙ্র পরম-আনন্দ
পডে ভক্তি-শ্লোক ভক্তি-সনে করি’ রঙ্গ
देखे विप्र-वर, ताङ्र परम-आनन्द
पडे भक्ति-श्लोक भक्ति-सने करि’ रङ्ग
 
 
अनुवाद
जब उस पुण्यात्मा ब्राह्मण ने भगवान की महान प्रसन्नता देखी, तो उसने अधिक भक्ति के साथ श्लोकों का पाठ किया।
 
When that virtuous Brahmin saw the great pleasure of the Lord, he recited the verses with greater devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)