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श्लोक 2.1.297  |
তিন পুত্র তাঙ্র কৃষ্ণ-পদ-মকরন্দ
কৃষ্ণানন্দ, জীব, যদুনাথ-কবিচন্দ্র |
तिन पुत्र ताङ्र कृष्ण-पद-मकरन्द
कृष्णानन्द, जीव, यदुनाथ-कविचन्द्र |
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| अनुवाद |
| उनके तीन पुत्र - कृष्णानंद, जीव और यदुनाथ कविचंद्र - कृष्ण के चरण कमलों पर मधुमक्खियों की तरह रहते थे। |
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| His three sons – Krishnananda, Jiva and Yadunath Kavichandra – lived like bees at the lotus feet of Krishna. |
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