श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 294
 
 
श्लोक  2.1.294 
এই-মত আবেশে বাখানে’ বিশ্বম্ভর
চারি-দণ্ড রাত্রি, তবু নাহি অবসর
एइ-मत आवेशे वाखाने’ विश्वम्भर
चारि-दण्ड रात्रि, तबु नाहि अवसर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विश्वम्भर परमानंद में लीन हो गये और देर रात तक अपनी व्याख्याएँ देते रहे।
 
Thus Vishvambhar became absorbed in ecstasy and continued giving his explanations till late night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)