श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 279-281
 
 
श्लोक  2.1.279-281 
প্রভু বলে,—“তোমার দুই-চরণ-প্রসাদে
নবদ্বীপে কেহ মোরে না পারে বিবাদে
আমি যে বাখানি সূত্র করিযা খণ্ডন
নবদ্বীপে তাহা স্থাপিবেক কোন্ জন?
নগরে বসিযা এই পডাইমু গিযাদেখি,—
কার শক্তি আছে, দূষুক আসিযা?”
प्रभु बले,—“तोमार दुइ-चरण-प्रसादे
नवद्वीपे केह मोरे ना पारे विवादे
आमि ये वाखानि सूत्र करिया खण्डन
नवद्वीपे ताहा स्थापिबेक कोन् जन?
नगरे वसिया एइ पडाइमु गियादेखि,—
कार शक्ति आछे, दूषुक आसिया?”
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "आपके चरणों की कृपा से नवद्वीप में कोई भी मेरे समक्ष शास्त्रार्थ में खड़ा नहीं हो सकता। नवद्वीप में कौन मेरे सूत्रों की व्याख्या का खंडन कर सकता है? मैं नगर के मध्य में सार्वजनिक रूप से उपदेश दूँगा। देखूँ तो किसमें मुझे चुनौती देने की शक्ति है।"
 
The Lord said, "By the grace of your feet, no one in Navadvipa can stand before me in debate. Who in Navadvipa can refute my interpretation of the sutras? I will preach publicly in the center of the city. Let us see who has the strength to challenge me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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