श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 247
 
 
श्लोक  2.1.247 
বৈষ্ণব-আবেশে মহাপ্রভু বিশ্বম্ভর
কৃষ্ণ-ময জগত্ দেখযে নিরন্তর
वैष्णव-आवेशे महाप्रभु विश्वम्भर
कृष्ण-मय जगत् देखये निरन्तर
 
 
अनुवाद
एक वैष्णव भाव में महाप्रभु विश्वम्भर ने कृष्ण को संसार में सर्वत्र विद्यमान देखा।
 
In a Vaishnava spirit, Mahaprabhu Vishvambhar saw Krishna as present everywhere in the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)