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श्लोक 2.1.244  |
“কিবা কৃষ্ণ প্রকাশ হৈলা সে শরীরে?
কিবা সাধু-সঙ্গে, কিবা পূর্বের সṁস্কারে?” |
“किबा कृष्ण प्रकाश हैला से शरीरे?
किबा साधु-सङ्गे, किबा पूर्वेर सꣳस्कारे?” |
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| अनुवाद |
| "क्या कृष्ण उनके शरीर में प्रकट हुए हैं? क्या यह भक्तों की संगति का परिणाम है या पूर्व शुद्धिकरण प्रक्रियाओं का?" |
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| "Has Krishna manifested in his body? Is this the result of the association of devotees or of prior purification processes?" |
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