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श्लोक 2.1.235  |
অন্যথা না ভজে কৃষ্ণ, দুষ্ট-সঙ্গ করে
পুনঃ সেই-মত মাযা-পাপে ডুবি’ মরে |
अन्यथा ना भजे कृष्ण, दुष्ट-सङ्ग करे
पुनः सेइ-मत माया-पापे डुबि’ मरे |
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| अनुवाद |
| “लेकिन यदि वह कृष्ण की पूजा नहीं करता और बुरी संगति में पड़ जाता है, तो वह पुनः पाप कर्मों और मोह की गहराई में डूब जाता है। |
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| “But if he does not worship Krishna and falls into bad company, he again sinks into the depths of sinful activities and attachment. |
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