যে করযে বন্দী, প্রভু! ছাডায সে-ই সে
সহজ-মৃতেরে, প্রভু! মাযা কর’ কিসে
ये करये बन्दी, प्रभु! छाडाय से-इ से
सहज-मृतेरे, प्रभु! माया कर’ किसे
अनुवाद
"हे प्रभु, जो किसी को बाँधता है, वही उसे मुक्त कर सकता है। अतः हे प्रभु, जो स्वभाव से ही मरा हुआ है, उसे आप क्यों धोखा देते हैं?
"Lord, only he who binds can set him free. So, Lord, why do you deceive someone who is dead by nature?
तात्पर्य
माँ के गर्भ में रहते हुए, वह सातवें महीने में रहने वाला प्राणी अपने प्रभु से दयनीय ढंग से इस तरह प्रार्थना करता है: "सर्वोपरि प्रभु की भ्रामक ऊर्जा, जिसने मुझे इस भौतिक अस्तित्व के जेल के घर में अच्छाई, जुनून और अज्ञानता की तीन रस्सियों से बंधे एक कैदी के रूप में बांध रखा है। दूसरे शब्दों में, प्रभु की बाहरी भौतिक ऊर्जा जिसके द्वारा मैं जो कृष्ण के प्रति विमुख और भुलक्कड़ हूँ, भ्रमित हो गया हूँ और जो मुझे भौतिक सुख का आनंद लेने के लिए पागल बनाकर सदैव त्रिगुणात्मक कष्टों से जला रहा है, प्रभु की यह वही भ्रामक ऊर्जा, जिसने मुझे सेवा के प्रति मेरे झुकाव को देखते हुए गुरु और कृष्ण की दया से प्रभु को जो मैं प्राप्त करता हूँ, मुझे भौतिक जेल के कष्टों से मुक्ति दिला सकती है। हे प्रभु, जिस क्षण मैं आपको भूल गया और आपको मेरे सदा के पूजनीय स्वामी और सभी कारणों के कारण के रूप में स्वीकार न करके आपसे दूर हो गया और जिस क्षण मैं उस भ्रामक वस्तु के प्रति समर्पित हो गया जो आपसे संबंधित नहीं है, उसी क्षण से, मेरी विकृत बुद्धि के परिणामस्वरूप, मैं एक जीवित शरीर जैसा हो गया हूँ, हालाँकि सांस लेता हूँ। दूसरे शब्दों में, भोक्ता के रूप में खुद को पहचानने और बेहोश पदार्थ का सेवक बनने के परिणामस्वरूप, मैं एक मृत शरीर से बेहतर नहीं हूँ। आप अपनी भ्रामक ऊर्जा के माध्यम से मुझे फिर से धोखा क्यों दे रहे हैं, जो उन व्यक्तियों को चकित कर देती है जो आपसे दूर हैं?" कृष्ण को भूल जाने से और अपने कामुक ज्ञान की मदद से लगातार अपनी इंद्रियों को संतुष्ट करने में व्यस्त रहने से, हम अदहोक्षज की पारलौकिक सेवा से विमुख हो जाते हैं। प्रकृति पर अधिकार करने या पदार्थ का सेवक बनने की हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति का यह प्रमाण है। दूसरे शब्दों में, जिस प्रकार भौतिक वस्तुएँ स्वतंत्र कार्य की विशेषता से रहित होती हैं, उसी प्रकार अपनी स्वतंत्रता के लिए अपनी संवैधानिक प्रवृत्ति का दुरुपयोग करने के परिणामस्वरूप, हम भी भ्रामक ऊर्जा से भ्रमित होकर अज्ञानता में विलीन हो जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥