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श्लोक 2.1.197  |
“চণ্ডাল ’চণ্ডাল’ নহে—যদি ’কৃষ্ণ’ বলে
বিপ্র ’বিপ্র’ নহে,—যদি অসত্পথে চলে” |
“चण्डाल ’चण्डाल’ नहे—यदि ’कृष्ण’ बले
विप्र ’विप्र’ नहे,—यदि असत्पथे चले” |
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| अनुवाद |
| “यदि कोई चाण्डाल कृष्ण का नाम जपता है तो वह चाण्डाल नहीं है, और यदि कोई ब्राह्मण पाप कर्मों में लिप्त रहता है तो वह ब्राह्मण नहीं है।” |
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| “If a Chandala chants the name of Krishna, he is not a Chandala, and if a Brahmin indulges in sinful activities, he is not a Brahmin.” |
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