श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  2.1.153 
করুণা-সাগর কৃষ্ণ জগত্-জীবন
সেবক-বত্সল নন্দ-গোপের নন্দন
करुणा-सागर कृष्ण जगत्-जीवन
सेवक-वत्सल नन्द-गोपेर नन्दन
 
 
अनुवाद
“भगवान कृष्ण दया के सागर, ब्रह्माण्ड के जीवन और आत्मा, अपने सेवकों के प्रेमी और ग्वाले नन्द के प्रिय पुत्र हैं।
 
“Lord Krishna is the ocean of mercy, the life and soul of the universe, the lover of his servants and the beloved son of the cowherd Nanda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)