श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  2.1.139 
কখনো কখনো যেবা হুঙ্কার করয
ডরে পলাযেন লক্ষ্মী, শচী পায ভয
कखनो कखनो येबा हुङ्कार करय
डरे पलायेन लक्ष्मी, शची पाय भय
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वे इस प्रकार जोर से गर्जना करते थे कि विष्णुप्रिया देवी डरकर भाग जाती थीं और शची भयभीत हो जाती थीं।
 
Sometimes he roared so loudly that Vishnupriya Devi would run away in fear and Shachi would become frightened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)