श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.1.138 
নিরবধি শ্লোক পডি’ করযে রোদন
“কোথা কৃষ্ণ! কোথা কৃষ্ণ!” বলে অনুক্ষণ
निरवधि श्लोक पडि’ करये रोदन
“कोथा कृष्ण! कोथा कृष्ण!” बले अनुक्षण
 
 
अनुवाद
भगवान लगातार श्लोक पढ़ते और पुकारते हुए लगातार विनती करते, "कृष्ण कहाँ हैं? कृष्ण कहाँ हैं?"
 
The Lord would continuously recite the verses and call out, constantly pleading, "Where is Krishna? Where is Krishna?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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