श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.1.132 
যে-যে-জন আইসে প্রভুরে সম্ভাষিতে
প্রভুর চরিত্র কেহ না পারে বুঝিতে
ये-ये-जन आइसे प्रभुरे सम्भाषिते
प्रभुर चरित्र केह ना पारे बुझिते
 
 
अनुवाद
जो भी प्रभु का स्वागत करने आया, वह उनकी विशेषताओं को समझने में असमर्थ था।
 
Whoever came to welcome the Lord was unable to understand His characteristics.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)