श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.1.13 
আগুবাডি’ সবে আনিলেন নিজ-ঘরে
তীর্থ-কথা সবারে কহেন বিশ্বম্ভরে
आगुवाडि’ सबे आनिलेन निज-घरे
तीर्थ-कथा सबारे कहेन विश्वम्भरे
 
 
अनुवाद
सभी ने भगवान का अभिवादन किया और उन्हें घर ले गए, जहाँ विश्वम्भर ने उन्हें अपनी तीर्थयात्रा की कथा सुनाई।
 
Everyone greeted the Lord and took him home, where Vishvambhara told them the story of his pilgrimage.
तात्पर्य
आगुवाडी’ शब्द का अर्थ "स्वागत करने के लिए पहले आना" या "पहले पहुँचना" होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)