श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  2.1.110 
বৈষ্ণব-সমাজে সবে, আইলা হরিষে
আনুপূর্বী কহিলেন আশেষ-বিশেষে
वैष्णव-समाजे सबे, आइला हरिषे
आनुपूर्वी कहिलेन आशेष-विशेषे
 
 
अनुवाद
वे सभी प्रसन्नतापूर्वक वैष्णव समुदाय के पास गए और सारी घटना विस्तारपूर्वक सुनाई।
 
They all happily went to the Vaishnava community and narrated the entire incident in detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)