श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.1.107 
এই সুখে সর্ব-দিন গেল ক্ষণ-প্রায
কথঞ্চিত্ সবা-প্রতি হৈলা বিদায
एइ सुखे सर्व-दिन गेल क्षण-प्राय
कथञ्चित् सबा-प्रति हैला विदाय
 
 
अनुवाद
इस आनंदमय अवस्था में पूरा दिन एक क्षण के समान बीत गया। फिर भगवान ने भक्तों से कुछ देर के लिए विदा ली।
 
In this blissful state, the entire day passed like a moment. Then the Lord took leave of the devotees for a while.
तात्पर्य
कृष्ण के वियोग में अत्यधिक व्याकुलता होने पर भी संकीर्तन के रस में डूबे गौरसुंदर ने कृष्ण के प्रेम के आनंद में पूरे बारह घंटे के दिन को पल भर के समान अनुभव किया। कृष्ण-प्रेम के मदिरा से उन्मत्त होकर अर्धचेतन अवस्था में भगवान् ने बड़ी मुश्किल से भक्तों से विदा ली।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)