श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  2.1.105 
প্রভু বলে,—“মোর দুঃখ করহ খণ্ডন
আনি’ দেহ’ মোরে নন্দ গোপেন্দ্র-নন্দন”
प्रभु बले,—“मोर दुःख करह खण्डन
आनि’ देह’ मोरे नन्द गोपेन्द्र-नन्दन”
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "कृपया मेरा संकट दूर करें। मुझे महाराज नन्द का पुत्र लाएँ।"
 
The Lord said, "Please relieve my distress. Bring me the son of Maharaja Nanda."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)