श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.1.104 
প্রভুর দেখিযা আর্তি কান্দে ভক্ত-গণ
কারো মুখে আর কিছু না স্ফুরে বচন
प्रभुर देखिया आर्ति कान्दे भक्त-गण
कारो मुखे आर किछु ना स्फुरे वचन
 
 
अनुवाद
भगवान की तीव्र लालसा देखकर सभी भक्त रो पड़े। वे सब बोल नहीं पा रहे थे।
 
Seeing the Lord's intense longing, all the devotees wept. They were unable to speak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)