vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
»
श्लोक 104
श्लोक
2.1.104
প্রভুর দেখিযা আর্তি কান্দে ভক্ত-গণ
কারো মুখে আর কিছু না স্ফুরে বচন
प्रभुर देखिया आर्ति कान्दे भक्त-गण
कारो मुखे आर किछु ना स्फुरे वचन
अनुवाद
भगवान की तीव्र लालसा देखकर सभी भक्त रो पड़े। वे सब बोल नहीं पा रहे थे।
Seeing the Lord's intense longing, all the devotees wept. They were unable to speak.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×