श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 9: नित्यानंद की बाल्य लीलाएँ और पवित्र स्थलों की यात्रा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.9.77 
তপস্বী বোলযে,—“যদি যাইবা নিশ্চয
স্নান করি’ কিছু খাই’ করহ বিজয”
तपस्वी बोलये,—“यदि याइबा निश्चय
स्नान करि’ किछु खाइ’ करह विजय”
 
 
अनुवाद
तब संन्यासी ने कहा, "यदि तुम्हें जाना ही है, तो पहले स्नान करके कुछ खा लो। फिर जा सकते हो।"
 
Then the monk said, "If you have to go, then first take a bath and eat something. Then you can go."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)