एक दिन भगवान ने रावण के पुत्र इंद्रजीत को मारने की लीला रची और एक दिन लक्ष्मण के आवेश में आकर उन्होंने हार स्वीकार कर ली।
One day God created a drama to kill Ravana's son Indrajit and one day, under the wrath of Lakshman, he accepted defeat.
तात्पर्य
इंद्रजीत-वध-लीला, यानी इंद्रजीत का वध पर विस्तार देखने के लिए रामयाण (लंका 88.64, 91.68-72) और महाभारत (वन 288.15-24) का संदर्भ देख सकते हैं।
लक्ष्मण-भावे हारे, अर्थात "लक्ष्मणवत हार मानना" का वृत्तांत रामयाण, लंकाकांड के अध्याय 45, 49, 50 और 73 में है और महाभारत (वन 287.20-26 और 288.1-7) में भी है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥