एक दिन उन्होंने कृष्ण की गोपियों के वस्त्र चुराने की लीला का मंचन किया, तथा दूसरे दिन उन्होंने ब्राह्मण पत्नियों से उनकी भेंट का मंचन किया।
One day he enacted the play of Krishna stealing the clothes of the gopis, and the next day he enacted his meeting with the Brahmin wives.
तात्पर्य
गोपीरा वसन-हरण के विषय में--गोपियों के कपड़े चुराने के विषय में श्रीमद् भगवतम् (10.22.1-28) देखें। यज्ञ-पत्नी दर्शन के विषय में - ब्राह्मणों की पत्नियों के मिलन के विषय में श्रीमद् भगवतम् (10.23.18-32) देखें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥