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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 9: नित्यानंद की बाल्य लीलाएँ और पवित्र स्थलों की यात्रा
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श्लोक 24
श्लोक
1.9.24
তাঙ্’রে ছাডি’ শিশু-গণ নাহি যায ঘরে
রাত্রি-দিন নিত্যানন্দ-সṁহতি বিহরে
ताङ्’रे छाडि’ शिशु-गण नाहि याय घरे
रात्रि-दिन नित्यानन्द-सꣳहति विहरे
अनुवाद
लड़के कभी भी नित्यानंद की संगति छोड़कर घर नहीं गए, बल्कि दिन-रात उनके साथ खेलते रहे।
The boys never left Nityananda's company and went home, but played with him day and night.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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