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श्लोक 1.8.96  |
মিশ্র বোলে,—“আজি মুই দেখিলুঙ্ স্বপন
নিমাঞি কর্যাছে যেন শিখার মুণ্ডন |
मिश्र बोले,—“आजि मुइ देखिलुङ् स्वपन
निमाञि कर्याछे येन शिखार मुण्डन |
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| अनुवाद |
| जगन्नाथ मिश्र ने उत्तर दिया, "आज मैंने स्वप्न देखा कि निमाई ने अपना सिर मुंडवा लिया है। |
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| Jagannatha Mishra replied, “Today I had a dream that Nimai had shaved his head. |
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