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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 92
श्लोक
1.8.92
দৈবে এক-দিন স্বপ্ন দেখি’ মিশ্র-বর
হরিষে বিষাদ বড হৈল অন্তর
दैवे एक-दिन स्वप्न देखि’ मिश्र-वर
हरिषे विषाद बड हैल अन्तर
अनुवाद
फिर एक दिन जगन्नाथ मिश्र को अप्रत्याशित रूप से एक स्वप्न आया जिसने उनके हृदय को एक साथ खुशी और शोक से भर दिया।
Then one day Jagannath Mishra unexpectedly had a dream which filled his heart with joy and sorrow simultaneously.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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