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श्लोक 1.8.83  |
ইহা দেখি’ মিশ্রচন্দ্র চিন্তেন অন্তরে
“ডাকিনী দানবে পাছে পুত্রে বল করে” |
इहा देखि’ मिश्रचन्द्र चिन्तेन अन्तरे
“डाकिनी दानवे पाछे पुत्रे बल करे” |
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| अनुवाद |
| अपने पुत्र की सुन्दरता देखकर जगन्नाथ मिश्र ने सोचा, "मुझे डर है कि कहीं मेरे पुत्र पर भूत-प्रेत या राक्षस आक्रमण न कर दें।" |
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| Seeing the beauty of his son, Jagannatha Mishra thought, "I am afraid that my son might be attacked by ghosts or demons." |
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