श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.8.83 
ইহা দেখি’ মিশ্রচন্দ্র চিন্তেন অন্তরে
“ডাকিনী দানবে পাছে পুত্রে বল করে”
इहा देखि’ मिश्रचन्द्र चिन्तेन अन्तरे
“डाकिनी दानवे पाछे पुत्रे बल करे”
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र की सुन्दरता देखकर जगन्नाथ मिश्र ने सोचा, "मुझे डर है कि कहीं मेरे पुत्र पर भूत-प्रेत या राक्षस आक्रमण न कर दें।"
 
Seeing the beauty of his son, Jagannatha Mishra thought, "I am afraid that my son might be attacked by ghosts or demons."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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